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बेल के पत्तों का रस पीने के फायदे-

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बेल के पत्तों का रस पीने के फायदे- बेल के पत्ते न सिर्फ शिव पूजा के लिए काम में ले जाते हैं अपितु यह है स्वास्थ्य की दृष्टि से भी अत्यंत लाभकारी है। बेल के पत्तों में टेनिन,फ्लेवोनॉयड्स और कुमरिन पोषक तत्व पाए जाते हैं जो अनेक शारीरिक व्याधियों के इलाज एवं रोकथाम में मददगार हैं । यह आपके शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करते हैं और बीमारियों से लड़ने की क्षमता प्रदान करते है। • मधुमेह (डायबिटीज) - बेल के पत्ते का रस शरीर में ब्लड शुगर का लेवल सही रखता है यह पेनक्रियाज को बल देता है जिससे इंसुलिन की सही मात्रा शरीर में बनी रहती है और आपका शरीर मधुमेह से सुरक्षित रहता है । • खून की कमी - यह शरीर में एनीमिया अर्थात रक्त की कमी को दूर करता है और हिमोग्लोबिन के स्तर को बढ़ाता है । • पाचन तंत्र- बेल के पत्तों का रस आँतो से विषैले तत्वों को बाहर निकालता है तथा पाचन तंत्र को मजबूत करता है। •  खुजली की समस्या -यह पित्त की समस्या को दूर करता है जिससे शरीर में दाग, धब्बे, दाद ,खुजली की समस्या नहीं होती है। •  सांस से जुड़ी हुई समस्या -अस्थमा के रोगिय...

वास्तु दोष और शिव पूजा - महाशिवरात्रि विशेष

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वास्तु दोष निवारण भी करती है शिव पूजा। महाशिवरात्रि यानी भगवान शिव को प्रसन्न करने और अपने मनोकामनाएं पूर्ण करने का महोत्सव है। महादेव थोड़ी सी भक्ति से भी शीघ्र प्रसन्न होने वाले देवता है वह तो मात्र सच्चे भाव से जल, बिल्वपत्र चढ़ाने और ''ओम नमः शिवाय'' मंत्र का जाप करने से भी भक्तों के बड़े से बड़े मनोरथ पूरे कर देते हैं। महाशिवरात्रि से जुड़ी मान्यता- शिव महापुराण के अनुसार इस दिन जो प्राणी निराहार और इंद्रियों को वश में रखकर उपवास रखता है और शिवलिंग के दर्शन ,स्पर्श, ध्यान करता है वह जन्म मरण के बंधन से मुक्त होकर शिवमय हो जाता है। मान्यता है कि शिव शंभू की पूजा से सभी ग्रह दोष शांत हो जाते हैं एवं सभी प्रकार के वास्तु दोषों का शमन भी होता है आइए जानते हैं कि अन्य लाभ और क्या है- • नकारात्मकता दूर होती है जहां भी वास्तु दोष हो वहां के सुख शांति के लिए शिवलिंग पर अभिषेक करने के बाद जलहरी के जल को घर लाकर उसे ''ओम नमः शिवाय कराल महाकाल कालम कृपालम ओम नमः शिवाय'' यह मंत्र जपते हुए पूरे भवन में छिड़काव करना चाहिए ऐसा करने से...

श्री गणेशाय नमः

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वक्रतुंड महाकाय, सूर्य कोटि समप्रभ निर्विघ्नम कुरू मे देव, सर्वकार्येषु सर्वदा।।