वास्तु दोष और शिव पूजा - महाशिवरात्रि विशेष

वास्तु दोष निवारण भी करती है शिव पूजा।

महाशिवरात्रि यानी भगवान शिव को प्रसन्न करने और अपने मनोकामनाएं पूर्ण करने का महोत्सव है। महादेव थोड़ी सी भक्ति से भी शीघ्र प्रसन्न होने वाले देवता है वह तो मात्र सच्चे भाव से जल, बिल्वपत्र चढ़ाने और ''ओम नमः शिवाय'' मंत्र का जाप करने से भी भक्तों के बड़े से बड़े मनोरथ पूरे कर देते हैं।


महाशिवरात्रि से जुड़ी मान्यता-

शिव महापुराण के अनुसार इस दिन जो प्राणी निराहार और इंद्रियों को वश में रखकर उपवास रखता है और शिवलिंग के दर्शन ,स्पर्श, ध्यान करता है वह जन्म मरण के बंधन से मुक्त होकर शिवमय हो जाता है। मान्यता है कि शिव शंभू की पूजा से सभी ग्रह दोष शांत हो जाते हैं एवं सभी प्रकार के वास्तु दोषों का शमन भी होता है आइए जानते हैं कि अन्य लाभ और क्या है-

नकारात्मकता दूर होती है
जहां भी वास्तु दोष हो वहां के सुख शांति के लिए शिवलिंग पर अभिषेक करने के बाद जलहरी के जल को घर लाकर उसे ''ओम नमः शिवाय कराल महाकाल कालम कृपालम ओम नमः शिवाय'' यह मंत्र जपते हुए पूरे भवन में छिड़काव करना चाहिए ऐसा करने से वहां के नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है सुख समृद्धि आती है शांति आती है गृह क्लेश दूर होता है

• उत्तर पूर्व दिशा इसकी दिशा मानी जाती है यह ईशान कोण होता है। सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह एवं शुद्ध विचारों में वृद्धि के लिए यहां शिव परिवार की तस्वीर लगाने से शुभ फलों में वृद्धि संभव है। वास्तुदोष से उत्पन्न अकारण भय परेशानी आदि के निवारण के लिए तुलसीदास जी द्वारा रचित श्री रुद्राष्टकम का पाठ किया जाना सकारात्मक परिणाम देगा।

• जिस तस्वीर में शिव परिवार एक साथ हो यानी भगवान शिव ,मां पार्वती, बेटे गणेश और कार्तिकेय हो वह तस्वीर घर में लगाना अति शुभ माना गया है। इससे घर में कलेश उत्पन्न नहीं होता और घर के सभी बच्चे आज्ञाकारी होते हैं वह उनकी एकाग्रता बढ़ती है।

• भगवान शिव का निवास कैलाश पर्वत उत्तर दिशा में है इस कारण शिव जी की फोटो घर के उत्तर दिशा में लगाना अति श्रेष्ठ रहता है। उत्तर दिशा में शिव जी की मूर्ति ऐसी जगह पर लगानी चाहिए जहां घर में आने जाने वाले सभी लोग महादेव के दर्शन कर सके इससे आपसी रिश्ते और मजबूत होते हैं।

     केशव श्रोत्रिय💐

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